जिन्हे पूर्णरूप से अपनी आत्मा का दर्शन मिल गया है । जिनकी
आत्मा पूर्णरूप से प्रकृतीय मोंह से मुक्त हो गई है । ऐसी आत्मा परम् सत्य का चिंतन
करते हुये यह अनुभव करती है कि उसका अपना रूप पूर्णतया परम् सत्य जैसा ही है । ऐसा
अनुभव आने पर उस मुक्त आत्मा का आचरण पूर्णरूप से परम् सत्य की गरिमा के अनुसार हो
जाता है । वह अवतार पुरुष बन जाता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें