रविवार, 23 नवंबर 2014

ब्रम्ह चेतना के प्रतीक

अवतारी पुरुष की मुक्त आत्मा अपने शरीर को ब्रम्ह के प्रगट होने का स्थल बनाती है । जो ब्रम्ह स्वरूप कृष्ण को प्राप्त हुआ वह किसी भी मुक्त आत्मा धारक को प्राप्त होगा । ऐसा नहीं है कि कृष्ण एक बार धरती पर आये और उपदेश करके चले गये । वह सदा विद्यमान हैं और हम सभी को मार्ग दिखाने को तत्पर हैं । प्रश्न है कि यदि हम आत्मा और ब्रम्ह को जानने और अनुभव करने को तत्पर हैं । यह आत्मा चेतना है जिसके वह प्रतीक हैं । 

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