अवतारी पुरुष की मुक्त आत्मा अपने
शरीर को ब्रम्ह के प्रगट होने का स्थल बनाती है । जो ब्रम्ह स्वरूप कृष्ण को
प्राप्त हुआ वह किसी भी मुक्त आत्मा धारक को प्राप्त होगा । ऐसा नहीं है कि कृष्ण
एक बार धरती पर आये और उपदेश करके चले गये । वह सदा विद्यमान हैं और हम सभी को
मार्ग दिखाने को तत्पर हैं । प्रश्न है कि यदि हम आत्मा और ब्रम्ह को जानने और
अनुभव करने को तत्पर हैं । यह आत्मा चेतना है जिसके वह प्रतीक हैं ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें