इस संसार का विषय ( आत्मा ) और
वस्तु ( प्रकृति ) से निर्मित समस्त स्वरूप मात्र अभिव्यक्ति हैं । दोनों ही परम्
सत्य के ही रूप हैं । जिस व्यक्ति में विषय स्वरूप की चेतना विकसित होकर वस्तु
स्वरूप से विरक्ति करा देती है वही मनुष्य संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठकर सम्पूर्ण
मानव समाज के कल्याण के लिये चेष्टारत हो जाता है । ऐसे मनुष्य के लिये ही कहा
जाता है कि भगवान ने जन्म लिया है और वह असुरी प्रवृत्तियों का दमन कर सद्वृत्तियों
का साम्राज्य स्थापित करेंगे ।
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