शनिवार, 22 नवंबर 2014

आत्मा और ब्रम्ह एकीकृत

अहंकार एक भिन्न अस्तित्व का बोध कराता है । यही अवाँक्षित होता है । आदर्ष स्वरूप होता है जब आत्मा अपने स्वरूप में ब्रम्ह का दर्शन पावे । यही स्थिति अवतारी पुरुष को प्राप्त हो जाती है । यह उनका प्रतिपल का सत्य अनुभव बन जाता है । उनके जीवन का प्रतिपल ब्रम्ह की गरिमा के अनुरूप होता है । 

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