इंद्रदेव प्रतर्दना से कहते हैं “ मैं ही वायु हूँ, मैं ही परम् ब्रम्ह हूँ । मेरी उपासना करो । जो मेरी
उपासना दीर्घायु होने के लिये करेगा और अमरत्व प्राप्त करने के लिये करेगा उसे इस
संसार में पूर्ण आयु का जीवन मिलेगा तथा स्वर्ग में उसे अमरत्व मिलेगा । “ यह वक्तव्य भी अवतार की धारणा का ही पोषक है । जब मुक्त आत्मा परम् सत्य के
साथ विलय का अनुभव करने लगती है तब उसका आचरण परम् सत्य की गरिमा के अनुरूप हो
जाता है । वही मनुष्य अवतार पुरुष बन जाता है ।
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