परम् सत्य सदैव अजन्मा ही होता है
। जन्म और मृत्यु की सीमायें परम् ब्रम्ह के लिये लागू नहीं हो सकती हैं । मनुष्य
के आत्मचेतना जागृत होने की दशा में मुक्त आत्मा ब्रम्ह के साथ एकीकृत हो जाने की
स्थिति उस मनुष्य को अवतारी पुरुष बना देती है । सामान्य मनुष्य में जन्मा हुआ
व्यक्ति आत्मचेतना जागृत होने पर मुक्त आत्मा की स्थिति प्राप्त कर लेने पर अवतारी
पुरुष बन जाता है ।
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