शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

ऋगवेद में वृतांत

विद्वान मुनि बामदेव कहते हैं मैं मनु हूँ. मैं सूर्य हूँ, मैं विद्वान ऋषि काकसिवान हूँ. मैं संत उस्ना हूँ, ...   ...  । यह वृतांत अवतार की धारणा का पोषक है । किसी व्यक्ति की आत्मा जब मुक्त दशा में हो जाती है तो वह परम् सत्य के साथ विलय का अनुभव करने लगती है । उसके कर्म परम् सत्य की गरिमा के अनुरूप हो जाते हैं । अवतार का यही स्वरूप होता है । 

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