शनिवार, 22 नवंबर 2014

भगवद्गीता में

योगेश्वर श्रीकृष्ण बताते हैं मोंह से मुक्त आत्मा, जिसे भय और क्रोध के वेग नहीं सताते, उसका मुझमें विलय हो जाता है, उसका अस्तित्व मेरे स्वरूप में विलीन हो जाता है, वह स्वयं परम् सत्य स्वरूप हो जाता है । यह स्थिति ही अवतार कही जाती है । 

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