भागवद् पुराण में कृष्ण अवतार का
वृतांत लिखते हुये वर्णन आता है कि “ मध्य रात्रि के गहन अंधकार में सबके हृदय में बसने
वाले परम् सत्य ने देव रूपिणी देवकी की धारणा में अपने को प्रगट किया । “ शाश्वत् प्रकाश पुँज गहन अंधकार में उदय हुआ । रहस्य का विमोचन गहन अंधकार की
मध्य रात्रि में हुआ । ग्यान ज्योति की सत्यता को असत्य का अंधकार आच्छादित नही कर
सकता है । कृष्ण अवतार का वृतांत दुर्वृत्तियों के गहन अंधकार की कालिमा के मध्य
आत्मबोध रूपी ज्ञान के प्रकाश का उदय होने का दृष्टांत की लक्षणात्मक अभिव्यक्ति है
।
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