आत्मा प्रधान व्यक्तित्व के
व्यक्तियों के संसार में प्रचलित नियमों को यदि कंचिद एक शब्द में व्यक्त करना हो
तो अवतार कहा जावेगा । यदि कंचिद परम् सत्य को मानव समाज का रक्षक माना जाय तो वह अपने इस
दायित्व के निर्वाह करने के लिये एक अवतारी पुरुष को सृजित करता है जो कि
समाज में व्याप्त दुष्प्रवृत्तियों का दमन करता है और नियमों का साम्राज्य स्थापित
करता है
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