मनुष्य जब इच्छाओं का त्याग करता
है तो उसे अहसास होता हैं कि जैसे उसका समस्त संसार उससे विक्षुड गया है । परंतु
यह स्थिति सृजित होने पर ही आत्मा का प्रकाश जीवन को प्रकाशित करेगा । एक
पूर्णरूपेण नया जीवन ही प्राप्त होगा । ऐसे मनुष्य में जैसे ब्रम्ह का जन्म हो गया
है । उसकी आँखों पर छाया मोंह लुप्त हो जावेगा । अब तक परवशता के कारागार में बंद
आत्मा स्वतंत्रता के आकाश में मुक्त साँस लेगी ।
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