अंधकार में भटकते हुये जब जिज्ञासु
त्रस्त हो जाता है तो वह ज्ञानी गुरू से याचना करता है कि मेरे सामने छाये अंधकार
का ज्ञान के प्रकाश से निवारण कीजिये मुझे ज्ञान की शांति की शीतल छाया सुलभ
कराइये । मुझमें व्याप्त समस्त ज्ञान प्राप्ति की बाधाओं का निवारण कीजिये । मेरे
खोये हुये विवेक को फिर से मुझमें स्थापित कीजिये । मुझे सहीं कर्मपथ प्रशस्थ
कीजिये । मेरी भटकती आत्मा को आश्रय प्रदान कीजिये । ऐसे कृतज्ञ जिज्ञासु को गुरू
पूर्णता का पथ प्रशस्थ करता है । आत्मज्ञानी बनने का मार्ग प्रशस्थ करता है ।
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