अवतार पुरुष कृष्ण समस्त मानव समाज
के हित के अनुरूप जो ज्ञान उपदेश किये उसमें उन्होने आत्मा के स्वरूप को बताया
उसके कर्तव्य दायित्व को बताया कर्म संविधान को बताया और सभी कुछ बताने के उपरांत
चुनाव का निर्णय प्रत्येक मनुष्य द्वारा स्वयँ करने के लिये छोड दिया । गुरू के
रूप में ज्ञानकी महिमा को बताया परंतु उसे हठात् किसी के ऊपर थोपा नहीं । ज्ञान के
जिज्ञासु को स्वयँ यह उत्कण्ठा होनी चाहिये कि वह ज्ञान को कैसे आत्मसात् करे । ज्ञान
जब स्वयँ अपना अनुभव बनेगा तभी उपयोगी होगा । मात्र बताने से कुछ नहीं मिलेगा ।
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