शनिवार, 6 दिसंबर 2014

सृष्टि की संरचना और लक्ष्य

इस सृष्टि के समस्त रूपों का सृजन परम् सत्य ने शून्य से किया है । इस रचना में उन्होने निर्माण सामग्री के रूप में प्रकृति का प्रयोग किया है । इस सृष्टि का लक्ष्य इन निर्जीव रूपों को ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित करना है । स्मरणीय है कि इस सृष्टि में परम् सत्य को जानना ही ज्ञान है । इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये परम् सत्य ने अपने ही अंश आत्मा को इसमें पिरोया है । जब आत्मा अपने सत्य स्वरूप को अहसास करते हुये, अपने को परम् सत्य के प्रतिनिधि के रूप में पहचानते हुये, परम् सत्य के लक्ष्य को अपने अस्तित्व का लक्ष्य मानते हुये लक्ष्य की पूर्ति में संलग्न होता है तो वह अवतारी पुरुष बनता है ।  

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