परम् सत्य पूर्णतया पारलौकिक स्वत:
अस्तित्व भी है और अपनी माया शक्ति के द्वारा संसार के समस्त रूपों का आधार भी है
। इन्ही कारणों से अवतार के सम्बंध में दोनो ही मत तर्क द्वारा सही प्रमाणित होते
हैं । एक मत कि परम् सत्य किसी परिस्थिति विषेस में अपने असीमित स्वरूप को मनुष्य
शरीर में सीमित करता है और दूसरा मत कि मनुष्य शरीर में विद्यमान आत्मा मुक्त
स्वतंत्र दशा में ब्रम्ह की पूर्णता प्रगट करती है । मनुष्य शरीर में परम् सत्य की
पूर्णता को अवतार कहा जाता है । सत्य रूप में उपरोक्त दोनो ही मत एक दूसरे के
पर्याय हैं ।
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