प्रकृति परम् सत्य की रचना है । प्रकृति
ही ब्रम्ह की व्यवस्था है । इसी व्यवस्था के माध्यम से ब्रम्ह सृष्टि का संचालन
करता है । प्रकृति नियम का साम्राज्य है । जब मानव समाज में नियमों का उलंघन एक आम
प्रचलित रीति बन जाती है तब व्याप्त कु-प्रथाओं तथा उत्पन्न हुई दुर्व्यवस्था को
नियंत्रित करने तथा नियम का साम्राज्य स्थापित करने के लिये अवतार होता है । एक
ऐसे व्यक्तित्व का उदय होता है जिसे परम् सत्य का पूर्ण ज्ञान एवं नियमों के प्रति
पूर्ण निष्ठा होती है एक अवतारी पुरूष का जन्म होता है ।
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