सोमवार, 8 दिसंबर 2014

अवतार का सत्य स्वरूप

यह विद्वानों के विचार मंथन का सदैव विषय रहा है कि अवतार परम् सत्य का मनुष्य शरीर में अवरोह है अथवा मनुष्य शरीर में विद्यमान आत्मा का मोंह से मुक्त हो स्वतंत्र दशा में परम् सत्य में विलीन होना है । प्रत्येक वह व्यक्ति जिसे अपनी आत्मा के सत्य रूप अर्थात् परम् सत्य का अंश स्वरूप मानते हुये उसके प्रति सचेत और आदर पूर्वक समर्पित भाव से रहता है वह सभी अवतारी पुरुष हैं । मानो परम् सत्य अपने को किसी मनुष्य शरीर के आवरण में ढक कर प्रस्तुत कर रहे हैं । एक निर्विवाद सत्य यह है कि बिना ब्रम्ह की कृपा के अवतारी पुरूष नहीं हो सकते । 

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