अवतार पुरुष कृष्ण का जन्म वासुदेव
व देवकी से बताया जाता है । मनुष्य के अंदर बसने वाला परम् ब्रम्ह का अंश वासुदेव
और दैवी प्रकृति देवकी । हमारे अंदर बसने वाली आत्मा उत्तरोत्तर तमोंगुण व रजोगुण
को सत्गुण द्वारा पराजित कर पुन: सत्गुण पर आच्छादित इच्छाओं को साफ करने पर शुद्ध
स्वतंत्र हो जाती है तब हमारे विवेक पर शुद्ध आत्मा प्रकाश दीप्तिमान होता है ।
मनुष्य शरीर में ब्रम्ह का ज्ञान प्रगट होता है । अवतार पुरुष का जन्म होता है
।
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