गुरू योगेश्वर कृष्ण का ज्ञान
उपदेश का लक्ष्य यह था कि जिज्ञासु अनुकरण कर्ता शिष्य भी वही स्तर प्राप्त कर सके
जिस स्तर पर पहुँच कर गुरू ज्ञान उपदेश कर रहा था । परम् ब्रम्ह का स्तर एक है ।
उस स्तर पर कोई तुलनात्मक स्थिति नहीं सम्भव होती है । जिसे ब्रम्ह का अनुभव मिल
जावेगा वह स्वयँ ब्रम्ह हो जावेगा । तुलनात्मक स्थिति प्रकृति के क्षेत्र की धारणा
है । ब्रम्ह लोकातीत है । ब्रम्ह का अनुभव मिलने पर अहंकार स्वत: विलीन हो जावेगा
। अंधकार और प्रकाश दोनों साथ नहीं रह सकते हैं । अंधकार का अस्तित्व तभी तक है जब
तक प्रकाश का प्रादुर्भाव नही हुआ है ।
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