यदि इस संसार के समस्त दु:खों एवँ कलह का कारण
मात्र मनुष्य की इच्छाओं से जनित होता तो फिर मछली में कैंसर क्यों पाया जाता है ।
विदित है कि कुछ कमीं अबोध प्रकृति द्वारा भी होती है । अवतारी पुरुष का निखरा
व्यक्तित्व सही अर्थों में यह अध्ययन करने में समर्थ होता है कि परम् सत्य के द्वारा इस
सृष्टि की रचना करने में निहित उद्देष्य और इस संसार का वास्तविक रूप जो विद्यमान है में क्या
भिन्नता है और वह त्रुटि कहाँ से पैदा हो रही है । वह उन त्रुटियों का निवारण भी करता
है ।
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